Wednesday, February 15, 2006

अपने साथी

हाथी तो है सबका साथी, भालू नाच दिखाता।
उछल-कूद बंदर की देखो, बड़ा मजा है आता।।

लम्बी गरदन ऊँट उठाकर, चश्मा पहने आये।
टप-टप-टप-टप घोड़ा दौड़े, सबके मन को भाये।।

बिल्ली और चूहे को देखो, दिन भर फिरते भागे।
हुआ सबेरा बांग लगाने, मुर्गा पहले जागे।।

चींटी की हिम्मत को मानो, कितना बोझा ढोये।
शेर गुफा के अन्दर घुसकर, रहता हरदम सोये।।

कौआ काँव काँव करता, सबसे खाता है गाली।
भौंरा मीठा गाना गाता, खुश हो जाता माली।।

रंग बिरंगे पंख लगाकर, तितली उड़ती रहती।
जब भी बोलो मीठा बोलो, कोयल रानी कहती।।

ये हैं सारे साथी अपने, इनका सबसे नाता।
इनका तो हर काम सदा ही, मन को है छू जाता।।

-यशपाल सिंह 'रवि`
***

एकता, ईमान

एकता

जन जन के कंठों से गूँजे अपना ये संदेश।
एक रहा है एक रहेगा अपना भारत देश ।।

मेरा देश विविधता वाला, इधर है सागर उधर हिमाला
उत्तर से दक्षिण तक फैला, तरह-तरह का रंग निराला
भारत धर्म निरपेक्ष जगत में सबसे अलग विशेष।
एक रहा है एक रहेगा अपना भारत देश।।

भाषा है आधार हमारा, कम नहीं फिर भी प्यार हमारा
ढाई आखर 'प्रेम` शब्द में बसता है विश्वास हमारा
प्रेम ज्योति में जल जाते हैं मन के सारे द्वेष।
एक रहा है एक रहेगा अपना भारत देश ।।
****
-यशपाल सिंह 'रवि'



ईमान

क्या आजकल का ईमान हो गया
जिसे भी मौका मिला बेईमान हो गया
कौन जाये मन्दिरों में पूजने पत्थर
पैसा ही कलियुग में भगवान हो गया
फूलों की आरजू में रोपा गुलाब था
यह निगोड़ा तो काँटों की खान हो गया
दर्द नहीं बाँटता है अब भाई भी भाई का
कितना खुदगर्ज आज का इंसान हो गया
किसको थमायें आज ये उम्मीद के दिये
कितना बेकाबू बेरहम ये तूफान हो गया
कुछ भी नहीं है महफूज़ अब इस जगह
ये बारिश में टपकता हुआ मकान हो गया
बच के रहना दूर इस रोग से ओ 'रवि`
इससे तो ग्रसित सारा जहान हो गया
****
-यशपाल सिंह 'रवि`
***

आ गया बसन्त

आने लगी बगियन में पीली बहार
बहने लगी पूरब की मीठी बयार
ठिठुरन का धीरे-धीरे होने लगा अन्त
मन में अहसास हुआ आ गया बसन्त।

किरनों के मोती हैं दमक रहे घास में
कलियों के अधर खुले भौरों की आस में
आमों की डाली भी झूम रही बौर से
फूल-फूल तितलियाँ घूम रहीं भोर से
मदमाती महुए की गंध दिग दिगन्त
मन में अहसास हुआ आ गया बसन्त।

अखुआईं कोंपलें फिर तरुओं की डाली पर
यौवन का नूर छाया कोयलिया काली पर
सरसों भी रीझ रही हरियाले खेत में
गौरैया मगन हुई आंगन के रेत में
ठहरा 'रवि` देखने को खुशियाँ अनन्त
मन में अहसास हुआ आ गया बसन्त।
****
-यशपाल सिंह 'रवि`

मेरे देश का किसान


देश की खुशहाली की खातिर हो जाता कुर्बान
मेरे देश का किसान, मेरे देश का किसान।
बारिश, ओले, तपती लू भी जिसको रोक न पाई
चीर के सीना इस धरती का जिसने फसल उगाई
जिसकी मेहनत के बल पर ही भारत बना महान।
मेरे देश का किसान, मेरे देश का किसान।।

शहरी दुनिया छोड़ जिसे है लगता प्यारा गाँव
दुनिया भर के सुख से बढ़कर है पीपल की छाँव
नीले अम्बर के नीचे है जिसकी ऊँची शान।
मेरे देश का किसान, मेरे देश का किसान।।

लालच, लोभ, स्वार्थ से जिसे न किंचित मोह हुआ है
गद्दारी-मक्कारी ने भी जिसको नहीं छुआ है
धन की खातिर कभी न जिसने बेंचा है ईमान।
मेरे देश का किसान, मेरे देश का किसान।।
****

-यशपाल सिंह 'रवि`

सरस्वती वंदना


प्रथम भारती नाम तुम्हारा
स्वर की देवी विनय हमारा
ज्ञान प्रदायिनी, हे जगमाता
मंगल शुभ कर दे !
हे माता सरस्वती वर दे !!

तू ही शारदा हंस वाहिनी
जगतिख्याता वीणापाणिनी
हे वागीश्वरी कुमुद प्रोक्ता
निर्मल मन कर दे !
हे माता सरस्वती वर दे !!

ज्ञान नहीं पर अहम समाया
तिमिर-जाल में मन भरमाया
ब्रह्मचारिणी हे बुद्धमाता
ज्योतिर्मय कर दे !
हे माता सरस्वती वर दे !!

दीप जला कर तेरे द्वारे
माँ भुवनेश्वरी तुझको पुकारे
हे वरदायिनि चन्द्रकान्ता
जग मग जग कर दे !
हे माता सरस्वती वर दे !!

-यशपाल सिंह 'रवि`

Sunday, September 18, 2005

मेरा परिचय


यशपाल सिंह 'रवि'
मेरा जन्म चन्द्रपुर, जिला सहारनपुर (उ॰प्र॰) के एक साधारण किसान परिवार में 06 जनवरी 1961 अर्थात माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (उत्तर भारत के प्रसिद्ध त्यौहार सकट / तिल सकरात/ गणेश चौथ) को हुआ।
घरेलू नाम जसपाल होने के कारण सब लोग प्यार से जस्सू कह कर पुकारा करते थे।प्राथमिक पाठशाला में प्रवेश के दौरान हेडमास्टर जी ने नाम और जन्म तिथि बदल कर जसपाल की जगह यशपाल सिंह एवं जन्म-तिथि 01 मार्च 1960 कर दिया। प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में ही हुई जबकि माध्यमिक शिक्षा पास के गाँव में स्थित 'आदर्श जूनियर हाई स्कूल, बड़गाँव(सहारनपुर)' में 1972-1975 तक प्राप्त की।हाई स्कूल एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के लिये 'महाराणा प्रताप स्मारक इन्टर कॉलिज, शिमलाना, सहारनपुर (उ.प्र.)' में सन् 1975-1979 तक पढ़ाई की। तत्पश्चात व्यावसायिक शिक्षा हेतु कन्हैया लाल पालिटेक्निक, रुड़की, (उ.प्र.) [उस समय रुड़की उत्तर प्रदेश का हिस्सा थी] प्रवेश लेकर 1972 में इलेक्ट्रानिक्स इन्जीनियरिंग म़ें त्रिवर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया।
शासकीय सेवा के सफ़र की शुरूआत सन् 1972 से भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के संस्थान प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) से एक साधारण कर्मचारी के रूप में हुई। परन्तु माता-पिता से विरासत मे मिली मेहनत, लगन और ईमानदारी की शिक्षा को अपने जीवन का अंग बनाकर तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ना प्रारम्भ किया और सन् 1990 में संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.), नई दिल्ली द्वारा किये गये चयन से प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) के लिये अभियन्ता (ई.एंड़.आई.) के पद पर नियुक्ति हुई।
शासकीय कार्यों एवं जिम्मेदारियों का निष्पादन पूर्ण समर्पण के साथ करते हुये उच्च शिक्षा हेतु प्रयास जारी रखे और 1995 में 'इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली' से 'डिप्लोमा इन मेनेजमेंट की उपाधि प्राप्त की, एवं सन् 2001 में 'इंस्टीटयूट आफ़ इंजीनियरिंग' में डिग्री प्राप्त की। और वर्तमान में प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) के सहायक प्रबंध (ई एडं आई) के पद पर रहते हुऐ अन्य पदों जैसे उप प्रबंधक (उपार्जन), इंचार्ज आई.टी. एवं जन सूचना अधिकारी की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियों को पूर्ण दायित्व के साथ निभा रहा हूँ। सांस्कृतिक, खेल-कूद एवं सामाजिक गतिविधियों में बचपन से ही रुचि है, बाल्यावस्था में ही सुभद्राकुमारी चौहान की 'झाँसी की रानी', रसखान के सवैये, सूरदास के पद, गिरधर की कुंडलियाँ, भूषण के छन्द, रहीम के दोहे और अनेक कविताएँ कंठस्थ थीं। गीत-संगीत, नाटकों में अभिनय, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भागीदारी कविता पाठ एवं कविताओं पर आधारित अन्त्याक्षरी मेरे रुचिकर क्षेत्र रहे हैं, वर्तमान शासकीय, पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ यथासंभव राष्ट्र-प्रेम और समाज की समस्याओं पर लिखना और मंच संचालन करना बेहद पसंद है।
***
- यशपाल सिंह 'रवि'