Wednesday, February 15, 2006

एकता, ईमान

एकता

जन जन के कंठों से गूँजे अपना ये संदेश।
एक रहा है एक रहेगा अपना भारत देश ।।

मेरा देश विविधता वाला, इधर है सागर उधर हिमाला
उत्तर से दक्षिण तक फैला, तरह-तरह का रंग निराला
भारत धर्म निरपेक्ष जगत में सबसे अलग विशेष।
एक रहा है एक रहेगा अपना भारत देश।।

भाषा है आधार हमारा, कम नहीं फिर भी प्यार हमारा
ढाई आखर 'प्रेम` शब्द में बसता है विश्वास हमारा
प्रेम ज्योति में जल जाते हैं मन के सारे द्वेष।
एक रहा है एक रहेगा अपना भारत देश ।।
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-यशपाल सिंह 'रवि'



ईमान

क्या आजकल का ईमान हो गया
जिसे भी मौका मिला बेईमान हो गया
कौन जाये मन्दिरों में पूजने पत्थर
पैसा ही कलियुग में भगवान हो गया
फूलों की आरजू में रोपा गुलाब था
यह निगोड़ा तो काँटों की खान हो गया
दर्द नहीं बाँटता है अब भाई भी भाई का
कितना खुदगर्ज आज का इंसान हो गया
किसको थमायें आज ये उम्मीद के दिये
कितना बेकाबू बेरहम ये तूफान हो गया
कुछ भी नहीं है महफूज़ अब इस जगह
ये बारिश में टपकता हुआ मकान हो गया
बच के रहना दूर इस रोग से ओ 'रवि`
इससे तो ग्रसित सारा जहान हो गया
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-यशपाल सिंह 'रवि`
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