Wednesday, February 15, 2006

अपने साथी

हाथी तो है सबका साथी, भालू नाच दिखाता।
उछल-कूद बंदर की देखो, बड़ा मजा है आता।।

लम्बी गरदन ऊँट उठाकर, चश्मा पहने आये।
टप-टप-टप-टप घोड़ा दौड़े, सबके मन को भाये।।

बिल्ली और चूहे को देखो, दिन भर फिरते भागे।
हुआ सबेरा बांग लगाने, मुर्गा पहले जागे।।

चींटी की हिम्मत को मानो, कितना बोझा ढोये।
शेर गुफा के अन्दर घुसकर, रहता हरदम सोये।।

कौआ काँव काँव करता, सबसे खाता है गाली।
भौंरा मीठा गाना गाता, खुश हो जाता माली।।

रंग बिरंगे पंख लगाकर, तितली उड़ती रहती।
जब भी बोलो मीठा बोलो, कोयल रानी कहती।।

ये हैं सारे साथी अपने, इनका सबसे नाता।
इनका तो हर काम सदा ही, मन को है छू जाता।।

-यशपाल सिंह 'रवि`
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